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सर्वपितृ अमावस्या: श्राद्ध पक्ष के आखिरी दिन पितर होते हैं विदा, श्राद्ध कर दिवंगत पूर्वजों से लें आशीर्वाद…

देहरादून

सर्वपितृ अमावस्या: श्राद्ध पक्ष के आखिरी दिन पितर होते हैं विदा, श्राद्ध कर दिवंगत पूर्वजों से लें आशीर्वाद…

देहरादून: आज सर्वपितृ अमावस्या है। यानी पितरों की विदाई का दिन है। श्राद्ध पक्ष में पितर 16 दिन के लिए देव लोक से धरती पर आते हैं। देव लोग जाते पितर अपने परिजनों को आशीर्वाद देकर लौटते हैं। सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनके परिजनों को पितरों की देहांत तिथि ज्ञात नहीं होती है या किसी कारणवश नहीं कर पाते। कहते हैं कि इस दिन श्राद्ध करने से भोजन पितरों को स्वथा रूप में मिलता है। कहते हैं कि पितरों को अर्पित किया गया भोजन उस रूप में परिवर्तित हो जाता है, जिस रूप में उनका जन्म हुआ होता है। अगर मनुष्य योनि में हो तो अन्न रूप में उन्हें भोजन मिलता है, पशु योनि में घास के रूप में, नाग योनि में वायु रूप में और यक्ष योनि में पान के रूप में भोजन पहुंचाया जाता है।

मान्यता है कि श्राद्ध कर्म करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है। अमावस्या तिथि आज शाम 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। पितृ पक्ष का आखिरी दिन सर्व पितृ अमावस्या मनाई जाती है। यह पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है। इसे पितृ विसर्जन अमावस्या के नाम से भी जानते हैं। आज श्राद्ध के लिए धरती पर आए पितरों की विदाई की जाती है। खीर, पूड़ी और अपने पितरों की मनपंसद चीजें बनाकर श्राद्ध कार्य किए जाते हैं। कहते हैं श्राद्ध में पितरों को दिये अन्न-जल से उन्हें संतुष्टि मिलती है और वो अपने परिवार के लोगों को खुशियों का आशीर्वाद देकर वापस लौटते हैं। आज अपने पितरों के निमित्त किसी ब्राह्मण को भोजन जरूर कराएं। बता दें कि सर्वपितृ अमावस्‍या पर हस्त नक्षत्र है। साथ ही सर्वार्थसिद्धि योग है। आज सूर्य, चंद्रमा, मंगल और बुध एक ही राशि में रहेंगे।

ऐसे में सूर्य और बुध मिलकर बुधादित्य यह बना रहे हैं और चंद्र-मंगल मिलकर महालक्ष्मी योग बना रहे हैं। ग्रहों की यह शुभ स्थिति दान-पुण्‍य करने के लिए बेहद शुभ है ।आज के दिन गंगाजल या किसी अन्‍य पवित्र नदी के जल को नहाने के पानी में मिलाकर स्‍नान करें। इसके बाद पितरों का तर्पण करके दान करें। इससे पितृदोष भी दूर होगा । सर्व अमावस्या के दिन श्राद्ध कर तर्पण करें। इस दिन अपने पितरों को खुश करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना चाहिए।

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