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फिलीपींस की पत्रकार मारिया और रूस के मुरातोव को शांति के लिए मिलेगा नोबेल पुरस्कार…

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फिलीपींस की पत्रकार मारिया और रूस के मुरातोव को शांति के लिए मिलेगा नोबेल पुरस्कार…

दिल्ली: आज भारत ही नहीं बल्कि विश्व के पत्रकार जगत में खुशी की लहर है। ‌दुनिया का सबसे बड़ा प्रतिष्ठित सम्मान पत्रकारिता के क्षेत्र में दिया गया है। बात को आगे बढ़ाने से पहले बता दें कि इन दिनों नोबेल पुरस्कार आने वाले नामों की घोषणा की जा रही है। इसी कड़ी में सबसे पहले चिकित्सा, फिजिक्स केमिस्ट्री, साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार देने के बाद शुक्रवार को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई। यह पहली बार हुआ है जब शांति के लिए महिला और पुरुष जो कि पेशे से पत्रकार हैं संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार देने का एलान किया गया है। जब इसकी जानकारी दुनिया भर में मीडिया संस्थान से पत्रकारों को हुई तो उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

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आपको बता दें कि फिलीपींस की मारिया रेसा और रूस के दिमित्री मुरातोव को इस साल का शांति का नोबेल पुरस्कार मिला है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया है। फिलिपींस की मारिया और रूस के दिमित्री पेशे से पत्रकार हैं। नोबेल कमेटी की अध्यक्ष बेरिट रीस-एंडरसन ने पुरस्कारों का एलान किया है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र और स्थायी शांति के लिए किए गए प्रयासों को देखते हुए इन्हें सम्मानित किया गया है। नोबेल कमेटी ने कहा है कि इन दोनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है, क्योंकि बोलने की आजादी ही लोकतंत्र और स्थायी शांति की पहली शर्त है। मारिया रेसा न्यूज साइट रैप्लर की को-फाउंडर हैं। उन्होंने 2012 में इसकी स्थापना की थी। रेसा ने अपने देश में सत्ता के दुरुपयोग और तानाशाही के खिलाफ अभिव्यक्ति की आजादी के लिए आवाज उठाई थी। वहीं दिमित्री मुरातोव भी एक पत्रकार हैं। उन्होंने रूस में नोवाजा गजेटा नाम के न्यूज पेपर की शुरुआत की थी। वो देश में फ्रीडम ऑफ स्पीच की रक्षा के लिए सालों से काम कर रहे हैं। उन्होंने चुनौतीपूर्ण समय में लोगों की आवाज उठाई थी।

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नोबेल कमिटी ने कहा कि अभिव्‍यक्ति की आजादी के लिए दोनों के प्रयासों को देखते हुए यह पुरस्‍कार दिया गया है। अभिव्‍यक्ति की आजादी किसी लोकतंत्र के लिए एक महत्‍वपूर्ण पूर्व शर्त है। नोबेल कमिटी ने दोनों के प्रयासों की सराहना की। कमिटी ने कहा कि स्‍वतंत्र और मुक्‍त तथा तथ्‍यों पर आधारित पत्रकारिता सत्‍ता के दुरुपयोग, झूठ और युद्ध दुष्‍प्रचार से रक्षा करता है। नार्वे की संस्‍था ने माना कि अभिव्‍यक्ति की आजादी और सूचना की स्‍वतंत्रता लोगों को जागरूक बनाती है। ये अधिकार लोकतंत्र के लिए पूर्व शर्त है और युद्ध तथा संघर्ष में रक्षा करते हैं। नोबेल कमिटी ने कहा कि मारिया और दमित्री को यह पुरस्‍कार दिया जाना इन मूलभूत अधिकारों की रक्षा करने के महत्‍व को दर्शाता है।

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