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Janmashtami 2021: 5500 साल बाद इस दुर्लभ संयोग में मनाई जाएगी जन्माष्टमी, ऐसे पूरी होंगी मनोकामनाएं…

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Janmashtami 2021: 5500 साल बाद इस दुर्लभ संयोग में मनाई जाएगी जन्माष्टमी, ऐसे पूरी होंगी मनोकामनाएं…

देहरादून: भगवान श्री कृष्ण के भक्तों के लिए विशेष खबर है। इस साल 30 अगस्त को जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। आचार्य पंकज पैन्यूली के अनुसार इस बार जन्माष्टमी पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार ज्योतिषीय गणना के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी के दिन लगभग उन्हीं तिथि नक्षत्र आदि तत्त्वों की पुनरावृत्ति हो रही है। जो आज से लगभग पांच हजार पांच सौ वर्ष पूर्व (5500) द्वापर युग में श्रीकृष्ण के जन्म के समय  थी। हालांकि इस बार के अलावा पहले भी समयान्तराल में ऐसा संयोग बनता रहा है, लेकिन बहुत काम बार ही ऐसा अद्धभुत योग बनता है,जिस योग में जगतपिता श्रीकृष्ण के रूप में धरातल में अवतरित हुए। इसे संयोग कहें या सौभाग्य कुछ भी कहा जा सकता है।

आपको बता दें कि हिन्दू धर्म के सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण और भविष्य पुराण आदि के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म महीना-भाद्र पद,पक्ष-कृष्ण, तिथि-अष्टमी, वार- बुधवार, नक्षत्र-रोहिणी और राशि-वृष अथवा चन्द्रमा का वृष राशिस्थ हुआ था। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 30 अगस्त सन 2021 को भी महीना-भाद्रपद, पक्ष-कृष्ण, तिथि-अष्टमी, वार- सोमवार, नक्षत्र-रोहिणी, राशि वृष अथवा चन्द्रमा वृष राशिस्थ हैं। अब इस प्रकार 30 अगस्त 2021 की पंचाग गणना और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म समय की पंचाग गणना करेंगे, तो वार (बुधवार) की समानता को छोड़कर बाकी सारे के सारे तत्त्वों में समानता है। वैसे शास्त्रों के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी को सोमवार की विद्यमानता को भी दुर्लभ ही माना जाता है। जो कि इस बार है। इस अनुसार उपरोक्त तिथि,नक्षत्र आदि की समानता के कारण ही कृष्ण जन्माष्टमी के दिन अति दुर्लभ योग की युति बन रही है, जिसे ‘जयन्ति’ योग की उपमा दी गयी है। जो अत्यन्त शुभ और पुण्यदायी मानी जाती है। तो आयें जानते हैं, सम्पूर्ण इच्छाओं की पूर्ति के लिए,भगवान श्री कृष्ण की  पूजा अर्चना कैसे करें? पूजा और व्रत विधि क्या है?
1. यदि आप आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं,तो कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की  बालरूप मूर्ति को चांदी की बांसुरी अर्पित करें,और घर में चांदी की गाय रखें।
2. यदि आप सन्तान  की इच्छा रखतें हैं, तो भी कृष्ण  जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की मूर्ति को चांदी की मूर्ति अर्पित करें।।
3. यदि आपको व्यापर में अपेक्षित उन्नति नही मिल रही है, तो जन्माष्टमी की रात 12बजे के बाद भगवान कृष्ण की मूर्ति का केशर मिश्रित दूध से अभिषेक करें।
4. यदि आप दरिद्रता से मुक्ति चाहते हैं, तो कृष्ण जन्माष्टमी के दिन दक्षणावर्ती शंख में में जल भरकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करें।।
5. यदि आप भगवान कृष्ण को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजनोपरान्त भगवान को गाय  के दूध की खीर का भोग अर्पित करें।

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कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजा और व्रत विधि क्या है?   
1.प्रातः स्नान आदि से निवृत होकर, व्रत के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाये।
2.घर के मन्दिर में साफ सफाई करें।
3.मन्दिर में स्थापित सभी देवी देवताओं का अभिषेक करें।
मुख्य रूप से भगवान कृष्ण की मूर्ति,कोशिश करें कि मूर्ति लड्डू गोपाल जी की हो का अभिषेक करें।।
5.लड्डू गोपाल को श्रृंगार के साथ झूले में बैठायें। 6.रात्रि के समय 12 बजे के बाद भगवान की यथा श्रद्धा       पूजा,अर्चना और आरती करें।।
पूजन सामग्री।        
1.चन्दन    2. रौली 3.अक्षत 4.शहद 5.दूध 6.चौकी 7. घी 8.मिश्री 9. माखन 10   भोग सामग्री 11.तुलसी।

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आपको बता दें कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत अधिक महत्व होता है। इस दिन विधि- विधान भगवान श्री कृष्ण की पूजा- अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस दिन पूजा- अर्चना करने से निसंतान दंपतियों को भी संतान की प्राप्ति हो जाती है।

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