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जलपान घपले में नियोजन अधिकारी पर गिरी गाज

उत्तराखंड

जलपान घपले में नियोजन अधिकारी पर गिरी गाज

UT- वन विकास निगम में बिना बैठक किए 2.32 लाख रुपये के जलपान और लाखों का साजो-सामान कौड़ियों के भाव नीलाम कराने संबंधी मामले की गाज आखिरकार नियोजन और मूल्यांकन अधिकारी त्रिलोक चंद पर गिर ही गई। निगम के प्रबंध निदेशक (एमडी) मोनिष मल्लिक ने उन्हें मुख्यालय से अटैच कर दिया। इसके साथ ही उन पर आगे की कार्रवाई भी संभव है। उत्तराखंड वन विकास निगम में वर्ष 2016 से 2017 के बीच फर्जी बिलों से जलपान के नाम पर दो लाख 32 हजार 883 रुपये ठिकाने लगाने की बात सामने आई थी। जिन बैठकों में जलपान का यह खर्च दिखाया गया था असल में वह बैठकें आयोजित भी नहीं की गई। क्योंकि निगम ने जिन तारीखों को मीटिंग हॉल में प्रयोग के लिए जलपान सामग्री की खरीद दिखाई गई है, न तो उन तारीख और न ही उन महीनों में किसी तरह की बैठकों का आयोजन किया गया।

आरटीआइ क्लब के महासचिव एएस धुन्ता की ओर से आरटीआइ में मांगी गई सूचना में इस बात का खुलासा हुआ था। इसके अलावा निगम में खरीदे गए लाखों रुपये के सामान को कौडिय़ों के भाव नीलाम कर दिया गया था। जागरण ने दोनों ही प्रकरण में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी और इस मामले में सोजेएनएन शल और इंटरनल ऑडिट भी कराया गया। इस बीच वन निगम में तेल बिल घोटाला, अध्यक्ष के नाम पर खरीदे गए सामान का घोटाला आदि पर भी जागरण ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। इस दिशा में वन विकास निगम के प्रबंधन निदेशक मोनिष मल्लिक ने अब तक की जांच में नियोजन एवं मूल्यांकन अधिकारी त्रिलोक चंद की हीलाहवाली पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से उन्हें क्षेत्रीय प्रबंधन कार्यालय (टिहरी क्षेत्र) से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया।

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सभी कार्मिकों पर हो कार्रवाई 

वन विकास निगम के स्केलर संघ ने निगम में तमाम गोलमाल को अंजाम देने में लिप्त सभी कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संघ के अध्यक्ष मान सिंह राणा ने कहा कि गोलमाल को लेकर खबरें प्रकाशित होने के बाद भी कार्रवाई न किए जाने पर पांच अगस्त से धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी गई थी। इस दिशा में कार्रवाई शुरू करते हुए नियोजन और मूल्यांकन अधिकारी को अटैच कर दिया गया है।

यह निर्णय उचित है, जल्द अन्य कार्मिकों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल पांच अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित किया जाता है। यदि जल्द मिलीभगत करने वाले अन्य कार्मिकों पर कार्रवाई नहीं की गई तो फिर से आंदोलन का ऐलान किया जाएगा। 

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