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वाह दैनिक जागरण फर्जी खबर छापने मे नही छोड़ी कोई कसर,मौत की गलत खबर प्रकाशित करने के बाद भी खेद प्रकट नही? इतनी भ्रामक रिपोर्टिंग पर भी जिला प्रशासन मौन ?

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वाह दैनिक जागरण फर्जी खबर छापने मे नही छोड़ी कोई कसर,मौत की गलत खबर प्रकाशित करने के बाद भी खेद प्रकट नही? इतनी भ्रामक रिपोर्टिंग पर भी जिला प्रशासन मौन ?


🔹✍🏻®️राजू परिहार: बागेश्वर।

हम राष्ट्रीय अख़बार के पत्रकार हैं जब हमारा मन करे किसी को भी मृत घोषित कर सकते हैं किसी को पुनः जीवित कर सकते हैं

यह कहना इस पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुये बिलकुल भी गलत नही होगा। फिर मामले को कोरोना-कोविड 19 की रिपोर्टिंग से ही क्यों न जोड़ना पड़े, इनकी नज़रों में सब जायज़ है।
दैनिक जागरण जैसा राष्ट्रीय अखबार की मनमानी अंदाज़ा आप लगा सकते हैं 26 अप्रैल के संस्करण में पेज नम्बर 3 पर बागेश्वर से एक खबर छपी है कि ”कोरोना के डर व आर्थिक तंगी से हुआ हार्ट अटैक” उसके बाद मौत।

जिसके बाद आज 27 अप्रैल को छापी “आर्थिक रूप से कमजोर नवीन को मदद की दरकार” नामक खबर से।
बागेश्वर में एक व्य9 क्ति जो जिंदा है, उसका दैनिक जागरण ने पहले निधन करा दिया। उसके बाद आज फिर उसे ज़िन्दा कर दिया वो भी आर्थिक रूप से लाचार बनाकर।

जागरण ने लिखा भकुनखोला, गरुड़ निवासी नवीन सिंह उम्र 48 साल को कोरोना-कोविड 19 संक्रमण हुआ तो नौकरी चली गई

बीते 21 मार्च को वह घर आ गया। पत्नी हिमानी और दो बच्चे निहाल 10 साल और सौरभ उम्र 7 साल की29 जिम्मेदारी उसी के कंधों में है।

भकुनखोला में वह किराए के मकान में रहता है। मुम्बई से आते ही नवीन को होम क्वारंटाइन कर दिया गया। ऐसे में परिवार के गुजर-बसर की चिंता होने लगी। बाहर भी नहीं जा सकता। किसी से मदद मांगे भी तो कैसे।

लोगों को वह संदिग्ध कोरोना मरीज लगता था। बीते 21 अप्रैल को उसको घर में ही हार्ट अटैक आ गया और बाद में निधन हो गया।

जबकि वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, नवीन को हार्ट अटैक आया ज़रूर पर समय रहते ईलाज मिलने से अब सुरक्षित है। दैनिक जागरण में जो ये खबर छपी है ये खबर पूरी तरह से गलत और झूठी है।
जब से यह खबर का सच लोगों के सामने आया तो चर्चाओं बाज़ार गर्म हो उठा। सभी को ज़िला प्रशासन की वैश्विक महामारी की भ्रामक रिपोर्टिंग के ख़िलाफ़ किसी बड़ी कार्यवाही का इन्तज़ार था।

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आज हर कोई यह अंदाज़ा लगाये हुए था कि सम्पादक के नाम खण्डन छाप कर खेद व्यक्त किया जायेगा।

ग़ौरतलब है कि ऐसा कुछ भी नही हुआ और ना ही आज के जागरण में कोई खेद व्यक्त करने की खबर छपी और ना ही कोरोना-कोविड 19 की इतनी भ्रामक रिपोर्टिंग पर भी जिला प्रशासन की कोई कार्यवाही ही देखने को मिली।

लिहाज़ा जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण पर अभी तक मौन बना हुआ है। सांत्वना के लिहाज़ से नवीन की आर्थिक कमजोरी को ढाल बनाकर “आर्थिक रूप से कमजोर नवीन को मदद की दरकार” नामक खबर छापकर इतिश्री कर दी।

फ़ेसबुक पर बागेश्वर के ब्यूरो चंद्रशेखर दिवेदी ने खबर की फ़ोटो के साथ अपनी अपीलीय अन्दाज़ में पोस्ट किया है “भकूनखोला के नवीन को मदद की दरकार। हम इनकी दीर्घायु की कामना करते है।

सभी मदद को आगे आएं।” किसी बेहूदा मज़ाक़ से कम नही है।

सवाल उठता है कि आखिर क्यों और कैसे दैनिक जागरण के संपादक ने इस न्यूज की बिना जांच-पड़ताल किये हुए इसे जगह दी ? क्या वैश्विक महामारी कोरोना के बारे में झूठी खबर प्रकाशित करने से पाठकों पर इसका क्या असर होगा, इस बात से दैनिक जागरण के संपादक अनजान हैं ? खबरों को पहले प्रकाशित करने की होड़ में फेक न्यूज फैलाना कैसी पत्रकारिता है ?

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