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Big News: उत्तराखंड के पहले बड़े मामले में देहरादून कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जानिए क्या है मामला…

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Big News: उत्तराखंड के पहले बड़े मामले में देहरादून कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जानिए क्या है मामला…

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी में खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाला अपराधी आज अपने अंजाम को पहुंच गया है। उत्तराखंड के पहले बड़े मामले में देहरादून कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मंगलवार को कोर्ट ने दून के आदर्श नगर में अपने ही परिवार के पांच सदस्यों की बेरहमी से हत्या करने वाले हरमीत सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही 307 और 316 धारा के तहत दस साल की कैद व एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। बता दें कि आरोपी के खिलाफ 7 साल के मासूम चश्मदीद की गवाही को अहम माना गया। पंचम अपर जिला जज आशुतोष मिश्र की अदालत ने इस मामले को रेयर आफ रेयर केस कहते हुए ये फैसला सुनाया है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दीपावली के दिन चकराता रोड आदर्श नगर में एक ही परिवार के गर्भवती महिला सहित चार सदस्यों की हत्या करने वाले आरोपित को कोर्ट ने सोमवार को दोषी करार दिया था। बता दें कि 24 अक्टूबर 2014 को आरोपित हरमीत सिंह ने अपने पिता जय सिंह, सौतेली मां कुलवंत कौर, सौतेली गर्भवती बहन हरजीत कौर और हरजीत कौर की बेटी सुखमणि की चाकू से गोद कर हत्या कर दी थी। हमले में हरजीत कौर के बेटे कमल को चाकू लगे थे। केस में कमल ही चश्मदीद गवाह रहा। आरोपी ने इस दिल दहलाने देने वाली घटना को प्रॉपर्टी के लालच में अंजाम दिया था। मामले में आज सात साल बाद आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। मुकदमे में कुल 21 गवाह पेश हुए थे। इन्हीं के आधार पर हरमीत सिंह को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 316 (गर्भस्थ शिशु की हत्या करना) में दोषी ठहराया गया।

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ये है पूरा मामला

गौरतलब है कि ये मामला 24 अक्टूबर 2014 को दीपावली की रात का है। इस घटना का पता तब चला जब नौकरानी राजी अगले दिन घर काम करने पहुंची थी। उस वक्त हरमीत घर पर ही था। उसने राजी को अंदर नहीं आने दिया और वहां से चले जाने को कहा। इस पर राजी ने जय सिंह के भतीजे और मुकदमे में शिकायतकर्ता अजीत सिंह को फोन कर बताया कि हरमीत घर का काम कराने से मना कर रहा है। अजीत ने जय सिंह को फोन किया, लेकिन फोन कट गया। दोबारा फोन किया तो हरमीत से बात हुई। अजीत ने मौके पर पहुंचकर पूछा कि जय सिंह कहां है तो हरमीत ने बताया कि वो कहीं गए हुए हैं। इस पर अजीत ने हरमीत से कहा कि गेट खोलो और राजी को घर का काम करने दो। हरमीत ने दरवाजा खोल दिया। राजी घर के अंदर दाखिल हुई तो हर तरफ खून बिखरा हुआ था। जय सिंह, कुलवंत कौर, हरजीत कौर और सुखमणि खून से लथपथ पड़े थे। राजी चीखते हुए बाहर आ गई और इसकी सूचना अजीत को दी। इस मामले में कैंट कोतवाली में हरमीत के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और आरोपी को सज़ा दिलवाई।

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